सोढ़ा परमारों का अमरकोट (सिंध) राज्य का इतिहास

सोढ़ा परमारों का अमरकोट (सिंध) राज्य का इतिहास


नौकोटी मारवाड़ के शासक परमार वंशी धरणीवराह के वंशज सोढ़ा जी हुए और इन्हीं सोढ़ा जी के नाम से इनके वंशज सोढ़ा परमार (पंवार) है। सोढ़ा नाम संस्कृत के सोढ़ से लिया गया है जिसका अर्थ है ताकतवर और बहादुर। सोढ़ा राजपूत परमार या पंवार राजपूत की एक प्रमुख खांप (शाखा) ही हैं। सोढ़ा जी जब बड़े हुए तब अपने लिए एक नए राज्य की तलाश में अमरकोट के शासक सुमरों के पास चले गए। सुमरा भी परमारों की एक शाखा है और अमरकोट में सुमरा परमार कई पीढ़ियों से राज्य कर रहे थे। चिमनजी कृत सोढ़ायण ग्रंथ से मालूम होता है कि सोढ़ा जी ने राताकोट पर आक्रमण किया और राताकोट के स्वामी राता को हराकर वहां अपना अधिकार स्थापित कर लिया। राताकोट को जीतने में सोढ़ा जी की सुमरा परमारों ने सहायता की थी। सोढ़ा जी के देहांत के बाद उनका पुत्र रायसी और रायसी के बाद उनका पुत्र राणा चाचकदे राताकोट के स्वामी हुए। राणा चाचकदे बड़े ही महत्त्वकांक्षी और शक्तिशाली राजपूत थे, उन्होंने अपने राज्य का विस्तार करने के लिए अपने बाहुबल से विक्रम संवत 1212 के लगभग कमजोर सुमरा परमारों को हराकर अमरकोट पर अधिकार कर लिया। अमरकोट उमरा सुमरा द्वारा बसाया हुआ माना जाता है। उमरा सुमरा का समय नवीं शताब्दी के अंतिम चरण में था। यह वही उमरा सुमरा है जिसने सालवा शाखा के चारण मामड़ जी की पुत्री हिंगलाज स्वरूपा आवड़दे के रूप की प्रशंसा सुनकर इनसे शादी करने की ठान ली थी और बाद में मां आवड़ ने उमरा सुमरा को अपना देवी स्वरूप दिखलाकर चमत्कार दिया था। राणा चाचकदे के देहांत के बाद जयभ्रभ, जसहड़, सोमेश्वर और धारावर्ष अमरकोट के शासक हुए। राणा धारावर्ष के दो पुत्र थे - दुर्जनशाल व आसराव। दुर्जनशाल तो अमरकोट के स्वामी हुए और आसराव ने कच्छ-भुज के उत्तर पश्चिम भाग पारकर पर अधिकार करके वहां नया राज्य स्थापित किया। दुर्जनशाल  के बाद राणा अवतारदे अमरकोट के स्वामी हुए। राणा अवतारदे के बाद क्रमशः थीरा व हम्मीर अमरकोट के स्वामी हुए। राणा हम्मीर के समय सैयदों का अमरकोट पर आक्रमण हुआ था, लेकिन राणा हम्मीर के बाहुबल के आगे सैयदों को पराजित होना पड़ा। राणा हम्मीर के बाद राणा बीसा गद्दी पर बैठे, इनके समय में ढूढा नामक शत्रु ने अमरकोट पर अधिकार कर लिया, लेकिन राणा बीसा ने थोड़े समय पश्चात ढूढा को हराकर वापस अमरकोट पर अधिकार कर लिया। राणा बीसा के बाद क्रमशः तेजसी, कुम्पा, चांपा, गंगा और पत्ता (राणा प्रसाद सिंह) अमरकोट की गद्दी पर विराजमान हुए। राणा पत्ता (राणा प्रसाद सिंह) के समय मुगल बादशाह हुमायूं के पुत्र अकबर का जन्म अमरकोट में हुआ था। राणा पत्ता (राणा प्रसाद सिंह) के बाद क्रमशः चन्द्रसेन, भोजराज व राणा ईश्वरदास अमरकोट के स्वामी हुए। राणा ईश्वरदास भी अपने समय के बड़े ही वीर राजपूत योद्धा थे। राणा ईश्वरदास के बाद भभूत सिंह, मेहराज सिंह, अर्जुन सिंह, चंद्र सिंह अमरकोट के स्वामी हुए। वर्तमान समय में अमरकोट के राणा हम्मीर सिंह है, जो कि अमरकोट के 26वें राणा है। राणा हम्मीर सिंह सोढ़ा वर्तमान समय में पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय है।

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