Brave Rajput
चुण्डावत सिसोदिया/गुहिलोतों का ठिकाने तथा शाखाओं सहित इतिहास
चूण्डावत (सिसोदिया/गुहिलोत) :-- राणा लाखा के पुत्र चुण्डा जी बड़े वीर व त्यागी पुरुष थे। रणमलजी राठौड़ की बहिन हंसाबाई का नारियल चूण्डाजी के लिए आया था, परंतु अपने पिता राणा लाखा की एक और शादी करने की इच्छा जाहिर होने पर चूण्डाजी ने उसे अपनी मां मान लिया और उनके पुत्र के लिए मेवाड़ का राज्य छोड़ दिया था, तब हंसाबाई का विवाह लाखाजी से हुआ। हंसाबाई की कोख से मोकल का जन्म हुआ। मोकल जी मेवाड़ के राणा बने। चूण्डाजी ने अपनी प्रतिज्ञा को जीवनभर निभाया। इन्हीं चूण्डाजी के वंशज 'चूण्डावत' कहलाते हैं। चूण्डावतों ने समय-समय पर मेवाड़ के राणाओं की सहायता की। खानवा युद्ध में राणा सांगा के पक्ष में कानोड़ के शासक जोगा चुण्डावत ने वीरगति प्राप्त की। अकबर द्वारा चित्तौड़ पर आक्रमण के समय राणा उदयसिंह के बाहर चले जाने पर चूण्डावत जग्गा के पुत्र पत्ता ने जयमल राठौड़ के साथ मिलकर अकबर की सेना के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की। चूण्डाजी के वंशज सांगा ने राणा प्रताप के पक्ष में हल्दीघाटी के मैदान में तलवार बजाई। ऊंटाले के युद्ध में विक्रमी संवत् 1665 में बेगूं के मेघसिंह ने महावतख़ां की फौज का सारा सामान लूट लिया। सलूम्बर इनका बड़ा ठिकाना था। इसके अलावा देवगढ़, बेगूं, आमेठ, मेजा, भैंसरोड़गढ़, बड़ावड़, कुराबड़, सोलज, रामगढ़ आदि बड़े ठिकाने तथा बेमाली, लणदा, ढाणा, बाठरड़ा, लसाणा, भदेसर, भगवानपुरा, करेडा, बंबारा, दौलतगढ़, खाटोला, बस्सी, जिलोला, ताल, ग्यानगढ़, तलोली, भादू, पीथावास, कोशीथल, मन्यास, धोलापाणी, कोटड़ा, रख्यावल, मानपुरा, बालाकोट, नोमोद, भटवाड़ा छोटा, साडांस, सुवावा, भरक, भणत्या, ऊदपुरा, देवलिया, काल्यास, फलासद, दांतड़ा, सरेड़ी, माल्यास, पीपल्या, लसाड्यां, जोगरास, चावड्या, गांगास, झालारा, कांडोली, पाण्डरू, बडू, खूंटया, करटा, आसपुरा, चिताव, बागड़, भाणाला, आमदला, टणका, खाखरमल, ठीकरया, नांदसा, अरणया, कूण्ठावा, सागर आदि अनेक छोटे-छोटे ठिकाने थे। बांसवाड़ा में गरखिया छोटा-सा ठिकाना था।
चुण्डावतों की निम्न शाखाएं हैं:--
1). कृष्णावत चूण्डावत :- चुण्डाजी के पुत्र कृष्णा जी के वंशज कृष्णावत चूण्डावत कहलाए।
2).जग्गावत(जगावत) चूण्डावत :- चूण्डाजी के पुत्र सिंह और सिंह के पुत्र जग्गा हुए। इन्हीं जग्गा के वंशज जग्गावत चूण्डावत कहलाते हैं।
3). सांगावत चूण्डावत :- सिंह के दूसरे पुत्र सांगा के वंशज सांगावत चूण्डावत कहलाए। करेड़ा व संग्रामगढ़ सांगावत चूण्डावतों के दूसरे दर्जे के ठिकाने थे। दौलतगढ़, बालसी, ज्ञानगढ़, तलोली, लुहारिया, निम्बाहेड़ा, धावड्या, इनके तीसरे दर्जे के ठिकाने थे।
4). खंगारोत चूण्डावत :- चूण्डाजी के पुत्र खंगार के वंशज खंगारोत चूण्डावत कहलाते हैं।
चुण्डावतों की निम्न शाखाएं हैं:--
1). कृष्णावत चूण्डावत :- चुण्डाजी के पुत्र कृष्णा जी के वंशज कृष्णावत चूण्डावत कहलाए।
2).जग्गावत(जगावत) चूण्डावत :- चूण्डाजी के पुत्र सिंह और सिंह के पुत्र जग्गा हुए। इन्हीं जग्गा के वंशज जग्गावत चूण्डावत कहलाते हैं।
3). सांगावत चूण्डावत :- सिंह के दूसरे पुत्र सांगा के वंशज सांगावत चूण्डावत कहलाए। करेड़ा व संग्रामगढ़ सांगावत चूण्डावतों के दूसरे दर्जे के ठिकाने थे। दौलतगढ़, बालसी, ज्ञानगढ़, तलोली, लुहारिया, निम्बाहेड़ा, धावड्या, इनके तीसरे दर्जे के ठिकाने थे।
4). खंगारोत चूण्डावत :- चूण्डाजी के पुत्र खंगार के वंशज खंगारोत चूण्डावत कहलाते हैं।


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