निकुम्भ/निकुम राजपूत वंश का इतिहास - Nikumbh/Nikum Rajput history


निकुम्भ/निकुम राजपूत वंश का इतिहास - Nikumbh/Nikum Rajput history

अयोध्या के प्रथम शासक इक्ष्वाकु के बाद क्रमशः विकुक्षि, पुरंञजय, अनेना, पृथु, विष्णाव, आर्द्र, युवनाश्व प्रथम, श्रावस्त, वृहदश्व, कुवलाश्व (धुन्धमार) हुए। राजा कुवलाश्व ने उत्तंग ऋषि के कहने पर धुन्धराक्षस को मारा। इस कारण राजा कुवलाश्व का नाम धुन्धमार भी हुआ। धुन्धराक्षस का स्थान राजस्थान में जयपुर-आमेर का क्षेत्र माना गया है, और यह क्षेत्र धुन्धमार प्रदेश ही ढूंढाड़ कहलाया। राजा कुवलाश्व के बाद क्रमशः दृढ़ाश्व, प्रमोद, हर्यश्व व निकुम्भ हुए। राजा निकुम्भ बलवान, शक्तिशाली तथा क्षात्रधर्म नरेश हुए। राजा निकुम्भ का बड़ा पुत्र सहताश्व तो अयोध्या का राजा बन गया और राजा निकुम्भ के अन्य पुत्रों के वंशजों में कोई अपने पूर्वज कुवलाश्व (धुन्धमार) के क्षेत्र राजस्थान में आए और यही राज्य करने लग गए। इसी सूर्यवंशी अयोध्या के राजा निकुम्भ के वंशज ही निकुम्भ या निकुम क्षत्रिय राजपूत हैं। निकुम्भ या निकुम राजपूत वंश भी राजपूतों के छत्तीस राजकुलों में से एक है। आभानेर में निकुम्भ राजपूतों का शासन काफी समय तक रहा। आभानेर से यह अलवर में आए और फिर अलवर के किले का निर्माण करवाया। विक्रम संवत् 12वीं शताब्दी में राजस्थान के अलवर क्षेत्र व मेवाड़ के माण्डलगढ़ क्षेत्र पर निकुम्भ राजपूतों का शासन था। महाराष्ट्र में भी इस समय के लगभग पाटन के आसपास भी निकुम्भ राजपूतों का शासन था। इस क्षेत्र के निकुम्भ राजपूत राजाओं में कृष्णराज, मोबिन, गोविन्दराज द्वितीय, कृष्णराज द्वितीय, इन्द्रराज, गोवन तृतीय, सोईदे व हिमाद्रिदेव के नाम मिलते हैं। (शिलालेख विक्रम संवत् 1210-1263)। राजस्थान के निकुम्भ राजपूतों के राज्य को लोदी सुल्तानों ने नष्ट कर दिया। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में बिरवा-हथौरा निकुम्भ राजपूतों का ठिकाना था। यहां के निकुम्भ राजपूत अपने को अलवर से यहां आना बताते हैं। निकुम्भ राजपूत आजमगढ़ और जौनपुर आदि जिलों में भी मिलते हैं।



निकुम्भ राजपूतों की एक खांप (शाखा) सिरनेत/श्रीनेत बताई जाती है। उत्तर प्रदेश में टेहरी इनका राज्य था और श्रीनगर (ऋषिकेश के पहाड़ी प्रदेश में) इनकी राजधानी थी। इन राजपूतों का दूसरा राज्य रूद्रपुर था। सुकनदेव, लवंगदेव, महीलोचन, भगवंत आदि यहां के राजा हुए। 1857 में अंग्रेजों के विरुद्ध होने के कारण इनका यह राज्य समाप्त हो गया। इस वंश के राजपूत जिला गोरखपुर, बलिया, सत्तासी, आवला, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, छपड़ा, दरभंगा, गाजीपुर आदि जिलों (बिहार) में है। सिरनेत/श्रीनेत की भी दो शाखाएं हैं :--

1). नरवनी :- नरवर (मध्यप्रदेश) से निकास के कारण यह सिरनेत/श्रीनेत नरवनी कहलाए। यह बिहार के छपरा व मुजफ्फरपुर जिलों में है।

2). कटहरिया :- बरेली, संभल के पश्चिम में, वसा व लखनोर के आसपास का क्षेत्र कटहर कहलाता है। इस कटहर क्षेत्र से निकलने के कारण यह कटहरिया कहलाते हैं।शाहजहांपुर, अलीगढ़, बुलन्दशहर, गाजीपुर, गोरखपुर आदि जिलों में कटहरिया हैं।

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