bhayal panwar history
भायल परमार का इतिहास और ठिकाने Bhayaal Parmar History
भायल परमार :-
मुहणोत नैणसी के अनुसार राजा उदयचंद के वंशजों से परमारों की बहुत सी खांपों(शाखाएं) का निकास हुआ। भायल खांप का निकास भी उदयचंद के वंशज भायल से हुआ था। यह राजा उदयचंद था कौन? अब हमें यह जानना है। परमारों के इतिहास के अनुसार मालवा का परमार राजा उदादित्य (1137-1143) था। नैणसी ने उदयचंद के पुत्रों में जगदेव का नाम भी लिखा है। यह जगदेव मालवा के राजा उदादित्य का पुत्र था, अतः कहा जा सकता है कि नैणसी का उदयचंद मालवा का राजा उदादित्य ही था। इस उदादित्य के शिलालेखों के अनुसार लक्ष्मीदेव व नरवर्मा, यह दो नाम मिलते हैं। परंतु नैणसी ने इन दोनो पुत्रों का नाम न देकर उदादित्य के अन्य पुत्र रिणधवल, आल, पाल, माधवदे, और जगदेव नाम दिया है। इसलिए संभव है शिलालेखों के अनुसार लक्ष्मीदेव व नरवर्मा के अतिरिक्त उदादित्य के पांच पुत्र और थे। राजा उदादित्य का पुत्र जगदेव, और जगदेव का पुत्र डाभरिया था। डाभरिया के बाद क्रमशः महारिख, साचर, उत्तमरिख, व पदमसी था। इसी पदमसी का पुत्र सज्जन भायल था और इसी सज्जन भायल के वंशज भायल परमार कहलाते हैं। मारवाड़ में रोहिसी भायल परमारों का प्रमुख गांव था। एक बार चांपा की सिघंल की राणी देवड़ी, सज्जन भायल के पास आ गई। तब चांपा, सज्जन भायल के पास युद्ध करने आ गया और युद्ध में सज्जन भायल और चांपा दोनों मारे गये। सज्जन भायल का पुत्र वीर भायल था, जो राव चंद्रसेन (जोधपुर) के समय चौहानों का गढसेन (जालौर) 12 गांवों के पास मारा गया। सांकर भायल का पुत्र बैरसल भायल जालौर की सेना के साथ युद्ध करते हुए घुघरोट नामक स्थान पर वीरगति को प्राप्त हो गया। बैरसी भायल ने भी जैतमालोत राठौड़ों के साथ लड़कर वीरगति पाई। रतन भायल का पुत्र सिखरा भायल विक्रम संवत् 1682 में बुरहानपुर में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। मारवाड़ में अरजियाण, मूंठली, घन्घरोअ, पीपूलाणा, कूण्डल समेत 12 गांव भायल परमारों के थे।


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