सोनीगरा चौहान तथा इनकी शाखाओं का इतिहास

सोनगरा चौहान वंश :-
नाडौल राज्य के संस्थापक लक्ष्मण के बाद क्रमशः बलिराज, विग्रहराज, महेन्द्रराज, अहिल, अणहिल, जेन्द्रराज, आसराज व अल्हण हुए। अल्हण के पुत्र कीर्तिपाल (कीतू) ने जाबलीपुर (जालौर) विजय किया। जाबलीपुर को स्वर्णगिरि भी कहा जाता था। इस स्वर्णगिरि (जालौर) के चौहान कीर्तिपाल (कीतू) के वंशज स्वर्णगिरि (सोनगरा) चौहान कहलाए। जालौर इनका मुख्य राज्य था। सोनगरे चौहान बड़े वीर हुए हैं। इनमें कान्हड़देव और उनके पुत्र वीरमदे इतिहास में प्रसिद्ध है। अखैराज सोनगरा ने भी सुमेल के युद्ध में एक सेनापति के रूप में अद्भुत वीरता दिखाते हुए वीरगति प्राप्त की।

अखैराज सोनगरा :-
जालौर के प्रसिद्ध शासक कान्हड़देव, सावंतसिंह सोनगरा के पुत्र थे। इनके छोटे भाई मालदेव थे। मालदेव के बाद क्रमशः बणवीर, राणा, लोला, सत्ता, खींवा, रणधीर व अखैराज हुए। नैणसी ने अपनी ख्यात में लिखा है कि इसी अखैराज के वंशज अखैराज सोनगरा कहलाते हैं। अखैराज अपने समय के बड़े वीर योद्धा थे। ये पाली ठिकाने के अधिपति थे। उनकी पुत्री जयन्ती देवी राणा उदयसिंह से ब्याही हुई थी। जिनके गर्भ से महाराणा प्रताप जैसे रणभट्ट और परम प्रतापी योद्धा का जन्म हुआ। सुमेल के युद्ध में विक्रमी संवत् 1600 में राव मालदेव सोनीगरा जोधपुर के पक्ष में लड़े और अद्भूत वीरता दिखाते हुए रणखेत हुए। इनके मालसिंह, भाणसिंह, उदयसिंह, भोजराज, जयमल, व रतनसिंह पुत्र थे। मालसिंह सोनीगरा विक्रमी संवत् 1633 के हल्दीघाटी के युद्ध में राणा प्रताप के पक्ष में लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। इनके पुत्र जसवंत सिंह राणा प्रताप के छापामार युद्धों में शामिल रहे। राजा उदयसिंह ने इनको बुलाया और विक्रमी संवत् 1644 में 27 गांवों का पाली का पट्टा दिया। बाद में विक्रमी संवत् 1665 के आसपास पाली ठिकाना छुट गया तब वह उदयपुर राणा के पास चले गए।

जसवन्त सिंह सोनीगरा के 11 पुत्र थे। इनमें सबसे बड़े पुत्र वीरमदेव सोनीगरा थे। इनके एक पुत्र जगन्नाथ को विक्रमी संवत् 1677 में पाली का ठिकाना मिला, परंतु 1691 में पाली फिर से छुट गई। इनके एक पुत्र श्यामसिंह सोनीगरा को जोधपुर रियासत के गुढ़ो-भाद्राजूण का ठिकाना मिला। जसवन्त सिंह के पुत्र राजसिंह के भी पाली का ठिकाना रहा, पर बाद में छुट गया। श्यामसिंह के पुत्र उदयभानसिंह, महाराजा जसवंतसिंह के साथ कई युद्धों में शामिल रहे। इनके अन्य भाईयों को मालवा में जमींदारियां मिली। उदयभान सिंह सोनीगरा के पुत्र भोपतसिंह को रतलाम राजा की सराहनीय सेवा करने पर एवं अद्भुत वीरता दिखाने पर 5 गांवों सहित नामली का ठिकाना विक्रमी संवत् 1788 में मिला। इनके वंशजों की रतलाम राज्य में बाजड़ा, सकरावाद, सिरखेड़ी, भदवासा, जावरा राज्य में बदगढ़, सैलाना राज्य में गुणावाद, ग्वालियर राज्य में बानीखेड़ी आदि की जमींदारियां मिली थी। रतलाम पर बापूराव सिंधिया द्वारा आक्रमम करने पर तेजसिंह सोनीगरा रतखेत रहे। तेजसिंह के वंशजों के अलावा मालवा में अन्य अखैराज सोनगरों की अरजला, अर संदला, उमरने, नलकोई, पिपलखूंटा, झरखेड़ी, काडरवास, आदि ठिकाने थे। जहां इनके वंशज आज भी निवास करते हैं।

सोनगरा चौहानों की निम्न शाखाएं (खांपें)हैं :-

1. बोडा सोनीगरा :- कीर्तिपाल (जालौर) के बाद क्रमशः समरसिंह, भाखरसी व बोडा हुए। इसी बोडा के वंशज बोडा सोनीगरा है। जालौर जिले में सेणा परगना इनके अधिकार में था।

2. रूपसिंहोत :- रूपसिंह सोनीगरा के वंशज रूपसिंहोत सोनीगरा है। यह राजस्थान के पाली जिले में निवास करते है और यही इनके ठिकाने है।

3. मानसिंहोत सोनीगरा :- अखैराज सोनगरा के पुत्र मानसिंह के वंशज मानसिंहोत सोनीगरा कहलाते हैं। इनके ठिकाने पाली जिले के आसपास है।

4. भानसिंहोत सोनीगरा :- अखैराज सोनगरा के पुत्र भानसिंह के वंशज भानसिंहोत सोनीगरा कहलाते हैं। यह राजस्थान के पाली जिले में निवास करते हैं। बीकानेर, जोधपुर रियासत में भानसिंहोत सोनीगरा चौहान के ठिकाने थे।

5. चांदण सोनीगरा :- सोनीगरा चौहानों की एक शाखा चांदण सोनीगरा है। शीशोदा के राणा हम्मीर, चांदण सोनीगरा चौहान राणी के पुत्र थे।

6. हापड़ सोनीगरा :- कीर्तिपाल (कीतू) जालौर के बाद क्रमशः समरसिंह, उदयसिंह, चाचकदेव और सामंतसिंह हुए। सामंतसिंह के बड़े पुत्र कान्हड़देव जालौर के शासक हुए और छोटे पुत्र हापड़ के वंशज हापड़ सोनीगरा कहलाते हैं।

7. बाघोड़ा सोनीगरा :- कान्हड़दे (जालौर) के पुत्र वीरमदे के भतीजे बाघ के वंशज बाघोड़ा सोनीगरा कहलाते हैं। बीकानेर के पास नाल गांव में बाघोड़ सोनगरा चौहान है। बाघोड़ सोनगरा की दो खांप है:-

*** भीला बाघोड़ा सोनगरा :- वीरमदे के भतीजे बाघ के पुत्र भीला के वंशज।

*** रोहेचा बाघोड़ा सोनगरा :- रोह गांव में रहने के कारण बाघ के वंशज रोहेचा बाघोड़ा कहलाए।

8. बालेचा सोनगरा :- बालेचा भी सोनगरा चौहानों की एक खांप है। किसी बाला के वंशज बालेचा सोनगरा चौहान हैं। टोडा (मालपुरा) में पहले इनका राज था।

9. अबसी :- कीर्तिपाल जालौर के पुत्र अबसी की संतान अबसी सोनगरा चौहान कहलाए।

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