सांचौरा चौहानों का इतिहास Sanchora Chauhan History


सांचौरा चौहान :-

सांचौरा चौहान की उत्पत्ति विवाद से परे नहीं है। नैणसी ने इनकी उत्पत्ति नाडौल के अश्वराज (1167-1172) के पुत्र आल्हण के पुत्र विजयसिंह से लिखते हैं। नैणसी ने आगे लिखा है कि विजयसिंह ने 1141 विक्रमी संवत् में सांचौर पर अधिकार किया। अश्वराज का समय 1167-1172 शिलालेखों से प्रमाणित हैं। अतः अश्वराज (1167-1172 विक्रमी संवत्) का पौत्र विजयसिंह 1141 विक्रम संवत् में सांचौर कैसे जीत सकता हैं? अब शिलालेखीय आधार भी देखिए। हरपालिया (बाड़मेर) में हरपाल नामक चौहान का 1346 विक्रम संवत् का शिलालेख मिला है जिसमें लिखा है कि सूर्यवंश के उपवंश चौहान वंश में राजा विजयसिंह हुए। उसके बाद बख्तराज, यशकर्ण, शुभराज, भीम आदि के बाद आठवें राजा हरपालदेव और राजकुमार सामन्तसिंह हुए।
यदि हम प्रति व्यक्ति का इतिहास सम्वत् समय 20 वर्ष माने तो विजयसिंह हरपाल से 12 पीढ़ी पहले था। अतः 240 वर्ष हुए। इस कारण विजयसिंह का समय 1346-240=1106 हुआ। इस दृष्टि से विजयसिंह का विक्रम संवत् 1141 में सांचौर विजय का समय ठीक जान पड़ता है। इससे निश्चित हो जाता है कि यह विजयसिंह, आसराज (1167-1172) के पुत्र आल्हण का पुत्र नहीं है तो प्रश्न खड़ा होता है कि फिर विजयसिंह का संबंध कहां से जुड़ता है? विक्रम संवत् 1377 के लूभ्मा के अचलेश्वर शिलालेख व माला आसियां के छप्पय से जान पड़ता है कि लक्ष्मण के पुत्र आसराव के वंशजों में प्रताप उर्फ आल्हण नाम का व्यक्ति हुआ, इसी का पुत्र विजयसिंह था। विजयसिंह के बाद पदमसी, शोभित व साल्ह हुए। बाद की ख्यातों में भूल से नाडौल के प्रसिद्ध शासक आसराज के पुत्र आल्हण से विजयसिंह का संबंध जोड़ दिया गया। अतः सिद्ध हुआ कि विजयसिंह देवड़ा था, जो लक्ष्मण के पुत्र आसराज के वंशज प्रताप उर्फ आल्हण का पुत्र था।
विजयसिंह ने सांचौर जीता। विजयसिंह के बाद पदमसी, शोभित व साल्ह हुए। अतः सांचौर पर शासन करने वाले विजयसिंह के वंशज सांचौरा चौहान कहलाए। सांचौरा चौहानों की अन्य कई छोटी छोटी खांपे भी है - बणीदासोत, सहसमलोत, नरसिंहदासोत, तेजमालोत, सखरावत, हरथावत आदि। सांचौर (जिला जालौर) क्षेत्र में सांचौरा चौहानों के कई छोटे बड़े ठिकाने हैं।

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