राणावत सिसोदिया/गुहिलोत तथा इनकी शाखाएं और ठिकाने


राणावत सिसोदिया/गुहिलोत :- मेवाड़ के महाराणा प्रताप के वंशज राणावत सिसोदिया कहलाते हैं। महाराणा प्रताप के पुत्र नाथाजी को जोलावस, सहसमलजी को धरियावाद, रामाजी व प्रचूरजी को उदल्लास, हरितसिंह को दांतड़ा, श्यामदासजी को जामूराया, जसवंतसिंह को जलोदा, शेखाजी को नाणा व बेड़ा (मारवाड़), कल्याणदास को फलसाद व पूर्णमलजी (पूराजी) को मंगरोप ठिकाने प्राप्त हुए। महाराणा प्रताप के पुत्र अमरसिंह महाराणा हुए। इनके पुत्र भीम सिंह टोडा के राजा थे। इनके वंशज रणथंभौर के पास है। उदयपुर के अलावा राणावतों की दूसरी रियासत शाहपुरा थी। बनेड़ा इनका मुख्य ठिकाना था। बनेड़ा ठिकाने के स्वामी को राजा की पदवी थी। अकबर ने भीम सिंह को राजा का खिताब दिया था। इनके वंशजों ने मेवाड़ के महाराणाओं की बहुत सहायता की। करजालीख, शिवरती, करोई, बामलास इनके प्रथम श्रेणी के प्रसिद्ध ठिकाने थे। धरियावाद इनके द्वितीय श्रेणी का ठिकाना था तथा बडल्यास, बरसल्यास, केर्या, मंगरोप, गुरला, जामोली, गाडरमाला, परसाद, हीगोली, बांसडा, कांकरया, सरवाणिया, पहुवा, मादड़ी, मंडाया, पारोली, कुचोली, नारेल्या, कारूड, जालोद, पहुनी, जेवाणां, तुरक्या, सादड़ी, बासणी, बारिया, गोनड़ा, अणुत, मांगरोले, खेड़ी, श्यामपुरा, जामूला, देवीसिंह खेड़ा, जैतपुरा, रामड़, नेतावल, लीड्य (खेड़ी), टूकरावा, आछोड़ा, रोजड़, रूपपुरा, लांगच, पचोरखेड़ा, बोरखेड़ा, माकड़या, सोडावास, पीथलपुरा, दादिया, गोपसेंण, दांतड़ा छोटा, इन्द्रपुरा, अगरपुरा, सुरावास, नणकेड्या, गांवली, मगपुरा, बुधपुरा, अगरया, भीमपुरा, बाखला, रासेड्या, परेड़, धांधला, तरण्या खेड़ा, हीसण्या, अरड़क्या, तीरोली, आटेट की नांगल, कनवोद, दादया, आसोप, बीखरणी, जंजोला आदि राणावतों के मेवाड़ में तीसरे दर्जे के ठिकाने थे। राणावतों की निम्न खांपे है :-

1). पुरावत राणावत :- राणा प्रताप के पुत्र पूर्णमल (पुरा) जी के वंशज पुरावत राणावत कहलाते हैं। पूर्णमल (पूरा) द्वारका गये और इसी समय लूणावाणे के सोलंकी राजा का मुसलमानों के साथ युद्ध हो रहा था। पूर्णमल ने सोलंकी राजा की सहायता की। इसलिए सोलंकी राजा ने पूर्णमल के पुत्र सबलसिंह को गुजरात में मलिकपुर, आडेर आदि की जागीर दी। यह जागीरें बाद में सबलसिंह के वंशधरों के अधिकार में रही। मंगरोप, गुरला, गाडरमाला, सीगोली, आमख्या, भाडलो, अंडसीपुर, सालेरा, अकोला छोटा, भीतपुरा, सामला, दांता, सुरास, सलामपुरा, जुवासा, भैसाकुण्ड आदि इनके मेवाड़ में ठिकाने थे।

2). गरीबदासोत राणावत :- अमरसिंह के पुत्र कर्णसिंह के पुत्र गरीबदास के वंशज गरीबदासोत राणावत कहलाते हैं। केरिया, बांसड़ा आदि इनके ठिकाने थे।

3). जयसिंहोत राणावत :- कर्णसिंह के बाद क्रमशः जगतसिंह, राजसिंह व जयसिंह हुए। इन्हीं जयसिंह के वंशज जयसिंहोत राणावत कहलाते हैं। इनके दो पुत्र उम्मेदसिंह व प्रतापसिंह थे। इनके वंशजों के क्रमशः कारोई और बायलास ठिकाने थे।

4). संग्रामसिंहोत राणावत :- जयसिंह के बड़े पुत्र संग्रामसिंह द्वितीय मेवाड़ के महाराणा हुए। इनके पुत्र नाथजी, बाघसिंह और अर्जुनसिंह की संतान संग्रामसिंहोत राणावत है। नाथजी के वंशजों की जागीर में बागोर, पीलदर आदि ठिकाने, बाघसिंह के वंशजों के पास करजाली आदि ठिकाने और अर्जुनसिंह के वंशजों के शिवरती आदि ठिकाने थे। उदयपुर के राणा फतेहसिंह शिवरती ठिकाने से ही गोद आकर उदयपुर की गद्दी पर विराजमान हुए थे।

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