भगवान श्री कृष्ण से लेकर जैसलमेर के वर्तमान महारावल तक की संपूर्ण वंशावली

1. श्रीकृष्ण
2. प्रद्युमन
3. अनिरुद्ध
4. वज्र
5. अचल
6. प्रतिबाहु
7. सुबाहु
8. गज प्रथम (गजसेन)
9. प्रतिबाहु द्वितीय
10. दतबाहु
11. सुभाव
12. देवरथ
13. पृथ्वीसहा
14. महिपत
15. मरजादत
16. सच्दतसेन
17. सूरसेन
18. उदीपसेन
19. अमरजीत
20. कनकसेन
21. सुगनसेन
22. मधवानजेत
23. करतसेन
24. भगवानसेन
25. विद्रथ
26. विक्रमसेन
27. कुमिदसेन
28. बिज्रपाल
29. दजीत
30. मूरतपाल
31. रकमसेन
32. कनकसेन
33. उतरासेन
34. सवावसेन
35. परतसेन
36. रामसेन
37. सहदेवसेन
38. देवसव
39. शंकरदेव
40. सूर्यदेव
41. प्रतापसेन
42. अवनीजव
43. भीमसेन
44. चन्द्रसेन
45. जगसवात
46. वेण
47. देवजस
48. मूलराज
49. रावदेव
50. सहुराव
51. देवन्द
52. जगभूप
53. युद्ध
54. रोहतास
55. प्रनसेन
56. महतन
57. वसुदेव
58. अलभाण
59. वीरसेन
60. सुभेव
61. सूरतसेन
62. गुणपबोध
63. जगमाल
64. भीमसेन
65. तेजपाल
66. भूपतसेन
67. रसान्हप
68. चन्द्रसेन
69. मुलमन
70. लालमन
71. सारंगदेव
72. देवरथ
73. जसपत
74. हंसपत
75. देवाकर
76. भारमल
77. खुमाण
78. अर्जुन
79. जुजसेन
80. गेनलाम
81. पदमरिख
82. गज द्वितीय (गजसेन द्वितीय)। इन्हीं महाराज गज द्वितीय द्वारा गजनी शहर बसाया गया था।
83. शालीवाहन।
84. बालन्द। बालन्द के सात पुत्र थे - भाटी, भुपति, कलुराव, झझ, सहराव, भैंसडेंस और मंगराव।
85. भाटी। बालन्द के बड़े पुत्र भाटी थे, इस वजह से यह सिंहासन पर बैठे और महाराज भाटी के नाम से इनके वंशज भाटी क्षत्रिय हो गये।
86. भूपति। महाराज भाटी के बाद भूपति गद्दी पर बैठे। यह भूपति महाराज भाटी के पुत्र थे।
87. भीम
88. सातेराव
89. खेमकरण
90. नरपत
91. गज तृतीय
92. लोमनराव
93. रणसिंह
94. भोजसी
95. मंगलराव
96. भोजसी द्वितीय
97. मडनरावल
98. सूरसेन
99. रघुराव
100. मूलराज
101. मझबराज। इन्होंने मारोठ का किला बनवाया। इनके तीन पुत्र थे, केहर, मूलराज और गोगली।
102. केहर। राव केहर यह अपने समय शूरवीर योद्धा थे और राव केहर के पांच पुत्र थे - राव तनु, उतेराव, चन्हड़(चहा), खापरिया और थहीम।
103. तनु। राव केहर के बड़े पुत्र तनु थे, इसलिए यह गद्दी पर बैठे। राव तनु ने ही विक्रम संवत् 787 में अपने नाम पर तन्नौट का किला और देवी का मंदिर बनवाया।
104. विजयराज प्रथम
105. देवराज
106. मूध
107. बच्छराज
108. दूसाजी
109. विजयराज द्वितीय। विजयराज द्वितीय बड़े वीर और दातार थे। इनको ही सोलंकी, पंवार आदि राजपूतों ने उत्तर भड़ किवाड़ भाटी की पदवी से विभूषित किया था। इनका विवाह सिद्धराज जयसिंह सोलंकी की पुत्री से हुआ था।
110. रावल जैसल। विजयराज द्वितीय के छोटे भाई और जैसलमेर के संस्थापक।
111. शालिवाहन
112. तेजसिंह
113. केलण
114. चाचिगदेव
115. कर्ण
116. जैतसिंह
117. लखनसेन
118. पुण्यपाल
119. जैतसिंह द्वितीय
120. मूलराज
121. रतनसिंह
122. रावल दूदा
123. महारावल घड़सिंह
124. महारावल केहर
125. महारावल लक्ष्मण
126. महारावल बैरसी
127. महारावल चाचिकदेव द्वितीय
128. महारावल देवकर्ण
129. महारावल जैतसिंह तृतीय
130. महारावल लूणकर्ण
131. महारावल मालदेव
132. महारावल हरराज
133. महारावल भीम सिंह
134. महारावल कल्याणदास
135. महारावल मनोहरदास
136. महारावल रामचंद्र
137. महारावल सबलसिंह
138. महारावल अमरसिंह
139. महारावल जसवन्त सिंह
140. महारावल बुद्धसिंह
141. महारावल तेजसिंह द्वितीय
142. महारावल सवाई सिंह
143. महारावल अखैसिंह
144. महारावल मूलराज
145. महारावल गजसिंह
146. महारावल रणजीत सिंह
147. महारावल बैरीशाल
148. महारावल शालीवाहन तृतीय
149. महारावल जवाहरसिंह
150. महारावल गिरधर सिंह
151. महारावल रघुनाथ सिंह
152. महारावल बृजराज सिंह वर्तमान - बृजराज सिंह जी जैसलमेर के वर्तमान महारावल है।

सन्दर्भ :-
1). पूगल का इतिहास - हरिसिंह जी भाटी
2). जैसलमेर की ख्यात
3). क्षत्रिय राजवंश - रघुनाथ सिंह जी कालीपहाड़ी
4). नैणसी री ख्यात
5). राजपूत रिकॉर्ड्स

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