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सिसोदिया/गुहिलोतों का नेपाल राज्य का इतिहास और वंशावली
गुहिलोत/सिसोदियों का नेपाल साम्राज्य :-
नेपाल के राजवंश का संबंध बप्पा रावल के 34वीं पीढ़ी में हुए चित्तौड़ के रावल समरसिंह के पुत्र कुम्भकर्ण से माना जाता है। चित्तौड़ के रावल समरसिंह के बड़े पुत्र रावल रतनसिंह थे, जो चित्तौड़ की गद्दी पर विराजमान हुए, रावल रतनसिंह के भाई ही कुम्भकर्ण थे। चित्तौड़ के रावल रतनसिंह पर जब 1303 ईस्वीं में अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया, तब रावल रतनसिंह युद्ध करते हुए युद्ध मैदान में वीरगति को प्राप्त हो गए और अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़ पर अधिकार हो गया। उस समय रावल रतनसिंह के भाई और बेटे चित्तौड़ से इधर उधर निकल गए। इन्हीं में से कुम्भकर्ण जी भी थे, कुम्भकर्ण जी के वंशज पृथ्वीनारायण शाह ने विक्रम संवत् 1825 में नेपाल के क्षेत्र पर अधिकार कर अपना राज्य स्थापित किया और काठमांडू को अपनी राजधानी बनाया।
पृथ्वीनारायण शाह के वंशज राजेन्द्रविक्रम शाह ने राजकल्पद्रुम ग्रंथ लिखवाया, जिसमें इन्होंने चित्तौड़ के रावल समरसिंह के पुत्र कुम्भकर्ण से लेकर पृथ्वीनारायण शाह तक की वंशावली लिखवाई जो इस प्रकार हैं :-
1. समरसिंह (चित्तौड़ के रावल)
2. कुम्भकर्ण ( चित्तौड़ के रावल समरसिंह के पुत्र और रावल रतनसिंह के भाई)
3. अयुत
4. परावर्म
5. कविवर्म
6. मथवर्म
7. अडम्बराय
8. भट्टराय
9. विक्रम
10. जिल्लराज
11. अजीत
12. अटलराज
13. तूथाराज
14. तिमिकराज
15. हरिराज
16. श्री ब्रह्माराज
17. मन्मथ
18. जैनखान
19. सूर्याखान
20. मीचाखान
21. विचित्रब्रह्मशाही
22. द्रव्यशाही
23. पूर्णशाही
24. रामशाही
25. डंबर
26. कृष्णशाही
27. रूद्रशाह
28. पृथ्वीपतिशाह
29. वरिभद्र
30. नरभूपालशाह
31. पृथ्वीनारायण शाह(1742-1774) - इन्होंने ही विक्रम संवत् 1825 यानि 1742 ईस्वीं में नेपाल बसाया।
इस प्रकार नेपाल राजवंश के पूर्वज मेवाड़ के कुम्भकर्ण के माने जाते हैं। नेपाल के महाराज पंचसरकार कहलाते थे और मंत्री तीन सरकार कहलाते थे। पृथ्वीनारायण शाह से आगे की वंशावली इस प्रकार हैं :-
32.सिंहप्रतापशाह (1774-1777)
33.रणबहादुरशाह (1777-1799)
34. युद्धविक्रमशाह (1799-1816)
35. राजावीरविक्रमशाह (1816-1847)
36. सुरेन्द्रवीर विक्रमशाह (1847-1881)
37. पृथ्वीवीर विक्रमशाह (1881-1911)
38. त्रिभुवन विक्रमशाह (1911-1955)
39. महेन्द्र विक्रमशाह (1955-1972)
40. वीरेन्द्रवीर विक्रमशाह (1972 से वर्तमान)
नेपाल के राजवंश का संबंध बप्पा रावल के 34वीं पीढ़ी में हुए चित्तौड़ के रावल समरसिंह के पुत्र कुम्भकर्ण से माना जाता है। चित्तौड़ के रावल समरसिंह के बड़े पुत्र रावल रतनसिंह थे, जो चित्तौड़ की गद्दी पर विराजमान हुए, रावल रतनसिंह के भाई ही कुम्भकर्ण थे। चित्तौड़ के रावल रतनसिंह पर जब 1303 ईस्वीं में अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया, तब रावल रतनसिंह युद्ध करते हुए युद्ध मैदान में वीरगति को प्राप्त हो गए और अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़ पर अधिकार हो गया। उस समय रावल रतनसिंह के भाई और बेटे चित्तौड़ से इधर उधर निकल गए। इन्हीं में से कुम्भकर्ण जी भी थे, कुम्भकर्ण जी के वंशज पृथ्वीनारायण शाह ने विक्रम संवत् 1825 में नेपाल के क्षेत्र पर अधिकार कर अपना राज्य स्थापित किया और काठमांडू को अपनी राजधानी बनाया।
पृथ्वीनारायण शाह के वंशज राजेन्द्रविक्रम शाह ने राजकल्पद्रुम ग्रंथ लिखवाया, जिसमें इन्होंने चित्तौड़ के रावल समरसिंह के पुत्र कुम्भकर्ण से लेकर पृथ्वीनारायण शाह तक की वंशावली लिखवाई जो इस प्रकार हैं :-
1. समरसिंह (चित्तौड़ के रावल)
2. कुम्भकर्ण ( चित्तौड़ के रावल समरसिंह के पुत्र और रावल रतनसिंह के भाई)
3. अयुत
4. परावर्म
5. कविवर्म
6. मथवर्म
7. अडम्बराय
8. भट्टराय
9. विक्रम
10. जिल्लराज
11. अजीत
12. अटलराज
13. तूथाराज
14. तिमिकराज
15. हरिराज
16. श्री ब्रह्माराज
17. मन्मथ
18. जैनखान
19. सूर्याखान
20. मीचाखान
21. विचित्रब्रह्मशाही
22. द्रव्यशाही
23. पूर्णशाही
24. रामशाही
25. डंबर
26. कृष्णशाही
27. रूद्रशाह
28. पृथ्वीपतिशाह
29. वरिभद्र
30. नरभूपालशाह
31. पृथ्वीनारायण शाह(1742-1774) - इन्होंने ही विक्रम संवत् 1825 यानि 1742 ईस्वीं में नेपाल बसाया।
इस प्रकार नेपाल राजवंश के पूर्वज मेवाड़ के कुम्भकर्ण के माने जाते हैं। नेपाल के महाराज पंचसरकार कहलाते थे और मंत्री तीन सरकार कहलाते थे। पृथ्वीनारायण शाह से आगे की वंशावली इस प्रकार हैं :-
32.सिंहप्रतापशाह (1774-1777)
33.रणबहादुरशाह (1777-1799)
34. युद्धविक्रमशाह (1799-1816)
35. राजावीरविक्रमशाह (1816-1847)
36. सुरेन्द्रवीर विक्रमशाह (1847-1881)
37. पृथ्वीवीर विक्रमशाह (1881-1911)
38. त्रिभुवन विक्रमशाह (1911-1955)
39. महेन्द्र विक्रमशाह (1955-1972)
40. वीरेन्द्रवीर विक्रमशाह (1972 से वर्तमान)


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