Brave Rajput
असिल, भटमेरा, आहड़िया और चंद्रावत सिसोदिया/गुहिलोतों का इतिहास और ठिकाने/राज्य
1). (गुहिलोत) :- कर्नल जेम्स टॉड ने लिखा है कि बप्पा का एक विवाह परमार क्षत्राणी से हुआ था। उसके गर्भ से जो पुत्र हुआ, उसका नाम असिल था। असिल अपने मामा के यहां चला गया। उसने सौराष्ट्र में अपना राज्य जमाया। इसी असिल के वंशज असिल गुहिलोत या आसलिया गुहिलोत कहलाए।
2). (गुहिलोत) :- मेवाड़ के रावल खुमाण द्वितीय के बाद क्रमशः महायक द्वितीय, खुमाण तृतीय, व भर्तभट द्वितीय हुए। इसी भर्तभट के वंशज आगे चलकर भटमेरा गुहिलोत कहलाए।
3). (गुहिलोत/सिसोदिया) :- चित्तौड़ के रावल रणसिंह (कर्णसिंह) के क्षेमसिंह, माहप व राहप आदि पुत्र थे। क्षेमसिंह चित्तौड़ के रावल हुए। उनके दो पुत्र सामंतसिंह व कुमारसिंह हुए। सामंतसिंह (विक्रमी संवत् 1228-1236) का कीर्तिपाल (कीतू) चौहान से संघर्ष हुआ। कीर्तिपाल ने सामंतसिंह को हरा दिया, वहां से सामंतसिंह मेवाड़ के आहड़ प्रदेश में चले गए और वहीं उन्होंने अपना राज्य स्थापित किया। सामंतसिंह पृथ्वीराज रासो के अनुसार तराइन के मैदान में पृथ्वीराज के पक्ष में लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की। इन्हीं सामंतसिंह के उत्तराधिकारी जयतसिंह के पुत्र सीहड़ के वंशज आहड़ प्रदेश के नाम से आहडिया गुहिलोंत कहलाए। आहड़िया गुहिलोतों के राज्य डूंगरपुर व बांसवाड़ा थे। डूंगरपुर राज्य में सांवली, औडा, नांदली ठिकाने वाले आहड़िया गुहिलोत ठाकुर हवेली वाले कहलाते हैं। इनके अलावा इसी राज्य में डामड़ी, आडा व मांडल आदि आहड़ियों के ठिकाने थे। बांसवाड़ा राज्य में खांदू, तेजपुर, सूरपुर आदि बड़े ठिकाने तथा देयदा, कुटानिया, भीमसोन, आमजा आदि छोटे-छोटे ठिकाने थे।
4 ). सिसोदिया/गुहिलोत) - मेवाड़ के रावल रणसिंह (कर्णसिंह) के छोटे पुत्र राहप को शीशोदा गांव की जागीर मिली। राहप के बाद क्रमशः नरपत, दिनकर, जसकण, नागपाल, पूर्णपाल, पृथ्वीपाल, भुवनसिंह, व भीमसिंह हुए। भीमसिंह के पुत्र चंद्र के वंशज चंद्रावत सिसोदिया/गुहिलोत हैं। उदयपुर में रामपुरा इनका राज्य था। बीकानेर रियासत में जोधासर इनका छोटा-सा ठिकाना था। रामपुरा के अलावा मध्य प्रदेश में मालाहेड़ा, भाट खेड़ी, हाड़ी पीपल्या, कुणा, महागढ़, बगुनिया, ढाबला, परासली बालोद, कालूखेड़ा, चीवलाना, बररेवी आदि ठिकाने थे। हरगिढ़, राजस्थान में भी इनका ठिकाना था।
2). (गुहिलोत) :- मेवाड़ के रावल खुमाण द्वितीय के बाद क्रमशः महायक द्वितीय, खुमाण तृतीय, व भर्तभट द्वितीय हुए। इसी भर्तभट के वंशज आगे चलकर भटमेरा गुहिलोत कहलाए।
3). (गुहिलोत/सिसोदिया) :- चित्तौड़ के रावल रणसिंह (कर्णसिंह) के क्षेमसिंह, माहप व राहप आदि पुत्र थे। क्षेमसिंह चित्तौड़ के रावल हुए। उनके दो पुत्र सामंतसिंह व कुमारसिंह हुए। सामंतसिंह (विक्रमी संवत् 1228-1236) का कीर्तिपाल (कीतू) चौहान से संघर्ष हुआ। कीर्तिपाल ने सामंतसिंह को हरा दिया, वहां से सामंतसिंह मेवाड़ के आहड़ प्रदेश में चले गए और वहीं उन्होंने अपना राज्य स्थापित किया। सामंतसिंह पृथ्वीराज रासो के अनुसार तराइन के मैदान में पृथ्वीराज के पक्ष में लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की। इन्हीं सामंतसिंह के उत्तराधिकारी जयतसिंह के पुत्र सीहड़ के वंशज आहड़ प्रदेश के नाम से आहडिया गुहिलोंत कहलाए। आहड़िया गुहिलोतों के राज्य डूंगरपुर व बांसवाड़ा थे। डूंगरपुर राज्य में सांवली, औडा, नांदली ठिकाने वाले आहड़िया गुहिलोत ठाकुर हवेली वाले कहलाते हैं। इनके अलावा इसी राज्य में डामड़ी, आडा व मांडल आदि आहड़ियों के ठिकाने थे। बांसवाड़ा राज्य में खांदू, तेजपुर, सूरपुर आदि बड़े ठिकाने तथा देयदा, कुटानिया, भीमसोन, आमजा आदि छोटे-छोटे ठिकाने थे।
4 ). सिसोदिया/गुहिलोत) - मेवाड़ के रावल रणसिंह (कर्णसिंह) के छोटे पुत्र राहप को शीशोदा गांव की जागीर मिली। राहप के बाद क्रमशः नरपत, दिनकर, जसकण, नागपाल, पूर्णपाल, पृथ्वीपाल, भुवनसिंह, व भीमसिंह हुए। भीमसिंह के पुत्र चंद्र के वंशज चंद्रावत सिसोदिया/गुहिलोत हैं। उदयपुर में रामपुरा इनका राज्य था। बीकानेर रियासत में जोधासर इनका छोटा-सा ठिकाना था। रामपुरा के अलावा मध्य प्रदेश में मालाहेड़ा, भाट खेड़ी, हाड़ी पीपल्या, कुणा, महागढ़, बगुनिया, ढाबला, परासली बालोद, कालूखेड़ा, चीवलाना, बररेवी आदि ठिकाने थे। हरगिढ़, राजस्थान में भी इनका ठिकाना था।


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