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वीर गौभक्त सवाई सिंह जी राठौड़ (भोमियाजी), जसोल
वीर गौभक्त सवाई सिंह जी राठौड़ (भोमियाजी), जसोल
सवाई सिंह राठौड़ भोमियाजी, जसोल ठिकाने के मालवी राव प्रताप सिंह के दूसरे पुत्र थे। इन दिनों मालवी क्षेत्र में सिंध के मुगल लुटेरों के आक्रमण व गाय बैलों को ले जाकर बेचने काटने के धर्म विरुद्ध कार्य से जनता परेशान थी। राव प्रताप सिंह राठौड़ (जसोल) ने वृद्ध अवस्था में होने के कारण, मुगल लुटेरों से जनता को निजात दिलाने का यह कार्य बडे पुत्र तखतसिंह को सौंपा। तब छोटे पुत्र सवाई सिंह राठौड़ ने बडे भाई तखत सिंह को दुश्मनों से स्वयं युद्ध करने के लिए मना कर दिया और कहा कि मैं यह कार्य मुझे सौंप दे, मैं इन लुटेरों को समाप्त करने का वचन देता हूं, इतना कहकर सवाई सिंह राठौड़ वहां से निकल पड़े। इसके बाद शूरवीर सवाई सिंह राठौड़ ने युद्ध में जाने से पहले कुलदेवी का स्मरण किया और सवाई सिंह राठौड़ की प्रार्थना सुनकर कुलदेवी प्रकट हुई और कुलदेवी ने कहां कि युद्ध के मैदान में जाने के बाद पीछे मुड़कर कभी मत देखना, मैं तुम्हारा सहयोग करुँगी और युद्ध में तुम्हारी ही विजय होगी । ऐसा कुलदेवी का वरदान पाकर सवाई सिंह राठौड़ ने 5000 मुगल लुटेरों की टुकड़ी से अकेले ही, दुश्मनों का संहार करते हुए, राजपूती गौरव को बनाए रखते हुए, रण के मैदान को दुश्मनों के रक्त से रंजित करते हुए शूरवीरता की नई गाथा रचते हुए सर्वत्र आगे बढते हुए विजयवीर बनते जा रहे थे।
तभी पीछे से घात लगाकर खडे दुश्मनों के आक्रमण का मुँह तोड़ जबाव देने की जल्दबाजी मे पीछे देखने पर कुलदेवी के वरदान अनुसार सवाई सिंह राठौड़ का धड़ अलग हो गया। फिर भी वीर गौभक्त सवाई सिंह राठौड़ ने बिना सर के सहारे ही दुश्मनों का संहार करते रहे और अंत में सभी मुगल लुटेरों को मारकर विजयश्री प्राप्त की । फिर सवाई सिंह राठौड़ बिना सर के अपने घोड़े पर बैठकर युद्ध मैदान से जसोल ठिकाने में प्रवेश किया, तब अपने पिताजी के दर्शन करते ही धरती माँ की गोद में वह शुरवीर घोड़े सहित समा गए। इस प्रकार वीर गौभक्त सवाई सिंह ने लुटेरों से अंतिम समय तक लडते हुए उनका संहार करते हुए बिना धङ वाला सर ऊँचा उठाये लडखडाते हुए पूज्यनीय पिताजी के अंतिम दर्शन कर के वीरगति को प्राप्त हो गये। इस वीरता और पराक्रम एवं राजपुती आन-बान-शान प्रदर्शित करने के कारण तथा गायों की रक्षा के खातिर अपने प्राणों का बलिदान करने के कारण सवाई सिंह जी राठौड़ को भोमियाजी के रूप में सभी जगह पूजा जाने लगा । इनका मंदिर राजस्थान के जसोल में है।
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जय मां भटियाणी 🙏🚩
जय सवाई सिंह जी राठौड़ भोमियाजी 🙏🚩
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